Maharashtra Police

सीकेपी ग्रुप के मालिक से फिरौती मांगने के मामले में पुलिस ने 2 अपराधियों को गिरफ्तार किया

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मुंबई पुलिस ने फिरौती मांगने के केस में दो लोगों को आज गिरफ्तार किया है। अपराधियों ने सीकेपी ग्रुप के मालिक प्रफुल्ला भट से, डेढ़ करोड़ रुपये फिरौती की मांग की थी। फिरौती की मांग व्हाट्सऐप कॉल के जरिए की गयी थी। सीकेपी ग्रुप के मालिक ने कहा की, पहली कॉल के बाद उन्होंने 5 लाख रुपये दे दिए थे। उसके बाद अपराधियों ने उन्हें 25 जनवरी को दोबारा फोन करके, 1.5 करोड़ रुपये की मांग की। दोबारा फिरौती मांगे जाने के बाद, भट ने बांद्रा थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में युसूफ खान और आइजज पठान को गिरफ्तार कर लिया गया है । दोनों अपराधियों की उम्र 35 वर्ष और 26 वर्ष है। इस मामले का मुख्य आरोपी रमयाल सिंह अभी फरार है।

भट्ट द्वारा पहली कॉल की अनदेखी करने के बाद, आरोपी ने सीकेपी ग्रुप कंपनी के एक कर्मचारी, राकसन से संपर्क करके उन्हें धमकी दी। 11 अक्टूबर को, सिंह ने राकसन को फोन किया और आरोप लगाया कि उन्हें अपने कार्यालय परिसर में कल 100 लोग मिलेंगे, जिनके साथ कंपनी ने कथित तौर पर धोखा किया था।

बांद्रा पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक पंडित ठाकरे ने गिरफ्तारी की पुष्टि की और कहा की, शिकायतकर्ता सीकेपी समूह के निदेशक हैं। हमने इस मामले में दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, लेकिन हम अभी भी मास्टरमाइंड की तलाश कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वह राजस्थान में है, लेकिन जैसा कि हमें उसका सटीक ठिकाना मालुम नहीं है, हमने अभी तक किसी दल को वहाँ नहीं भेजा है। पुलिस कहा कि उन्हें एक व्यक्ति से 16 सितंबर, 2017 को पहली बार फोन आया, जो खुद को रियाल सिंह के रूप में बता रहा था। उसने खुद को एक रिपोर्टर होने का दावा किया था। अपराधियों ने कहा की, उन्हें भट्ट की कंपनियों की पूरी सूची मिली है। सिंह ने कहा कि वह सूची भेजकर, आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय से शिकायत करेंगे।

बाद में 9 दिसंबर को कथित कॉल करने वालों ने सीकेपी के बांद्रा कार्यालय को, एक समाचार पोर्टल के विज़िटिंग कार्ड के साथ एक पत्र भेजा था। पत्र में, उन्होंने भट्ट को तीन दिनों के भीतर धोखाधड़ी के आरोपों को स्पष्ट करने की मांग की थी। शिकायत में आगे कहा गया था की, 18 दिसंबर को, तीन लोग कैमरे के साथ भट के कार्यालय के बाहर आए और एक वीडियो की शूटिंग करना शुरू कर दिया। उसके बाद भट ने अपने बाउंसर्स को गेट पर नियुक्त किया था, ताकि वे तीनों अन्दर ना प्रवेश कर सकें। तीनों ने एक संदेश छोड़ दिया और कहानी को प्रकाशित नहीं करने के लिए, 1.5 करोड़ रुपये की मांग की।

शिकायतकर्ता ने कंपनी के एक अन्य निदेशक से परामर्श किया, और उसकी सलाह पर 20 दिसंबर को सिंह से संपर्क किया। 3 जनवरी को शिकायतकर्ता ने सांताक्रूज़ में सिंह से मुलाकात की। वहां उसने कथित तौर पर कहा, मैंने एक हत्या की हुई है । दूसरा तेरा हो गया तो मुझे कोई फर्क नही पड़ता। इसके बाद शिकायतकर्ता, सिंह को 5 लाख देने पर सहमत हुए।

इस घटना में मुंबई पुलिस की तारीफ़ करनी होगी। पुलिस ने इस मामले में जल्दी एक्शन लेते हुए, दो अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। उम्मीद है तीसरा अपराधी भी, जल्दी ही पुलिस के सिकंजे में होगा।

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