Property dealer shot dead in delhi returning from marriage

दिल्ली में प्रॉपर्टी डीलर की गोली मार कर हत्या, सभी अपराधी फरार

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Property dealer shot dead in delhi returning from marriage

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दिल्ली में एक प्रॉपर्टी डीलर को कुछ अज्ञात लोगों ने सड़क पर गोली मार दी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पूर्व दिल्ली के गीता कॉलोनी के निवासी विनोद मेहरा, अपने 15 वर्षीय भतीजे कुणाल के साथ घर लौट रहे थे। वह अलीपुर में एक विवाह समारोह से लौट रहे थे। मेहरा को उनकी छाती में करीब से गोली मारी गई। उन्हें अपने भतीजे और पड़ोसियों द्वारा संत परमानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया, जो एक अन्य कार में उसी शादी से लौट रहे थे। अस्पताल में डॉक्टरों ने मेहरा को मृत घोषित कर दिया।

पीड़ित का भतीजा कुणाल, जो हत्या का एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी था, ने पुलिस को बताया कि उनके चाचा वॅगन आर कार चला रहे थे। तेज गति में आ रही इको कार ने उनकी कार को टक्कर मारी। मेहरा ने अपनी कार की खिड़की से ड्राइवर को सावधानी बरतने को कहा। उसके बाद इको कार वाले ने, मेहरा की कार को ओवरटेक करके उनका रास्ता ब्लॉक कर दिया। उसके बाद दो लोग इको कार से बाहर निकल गए, और मेहरा को बाहर आने के लिए कहा। मेहरा के भतीजे ने उन्हें बाहर जाने से मना किया। वह लोग अपराधियों की तरह दिख रहे थे और नशे में संलिप्त थे। इस पर मेहरा ने कहा की, उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है।

कुणाल ने पुलिस को बताया कि दो लोगों में से एक ने दावा किया कि, कार में बैठा तीसरा व्यक्ति शार्प शूटर है और मेहरा को मार डालेगा। फिर तीसरा आदमी कार से बाहर आ गया और कथित रूप से मेहरा पर पिस्टल तान दी। अधिकारी ने कहा, कुणाल ने आदमी के हाथ पर मारा, लेकिन उस समय तक उसने एक गोली चला दी थी। मेहरा को सीने में गोली लग गयी, और हमलावर अपने वाहन में भाग गए।

परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि, मेहरा और कुणाल दोनों ने यात्रियों से अनुरोध किया, लेकिन कोई भी नहीं रुका। दो-तीन मिनट बाद मेहरा सड़क पर गिर गए। कुणाल ने मदद के लिए आगे बढ़ना जारी रखा। कुछ लोगों ने कार रोके, लेकिन मामले के बारे में पूछताछ कर चले गए। लगभग 10 मिनट बाद कुणाल की निजी ट्यूटर उसी शादी में शामिल होकर, अपने पति के साथ लौट रही थी। उन्होंने उन्हें देखा और वाहन को रोक दिया। उन्होंने मेहरा को उनकी कार में बिठाया, और पास के एक अस्पताल में ले गए।

मंगतराम ( महरा के पिता ) ने कहा कि उन्होंने पुलिस के कुछ कर्मियों को देखा, और उन्हें मदद के लिए कहा। पुलिसकर्मियों ने मदद नहीं की। उन्होंने मेरे पोते और उनके शिक्षक से, मेरे बेटे को सेंट स्टीफंस के अस्पताल ले जाने के लिए कहा। पुलिसकर्मी ने कहा कि, वे कार को फॉलो करेंगे लेकिन वे साथ नहीं आए। पुलिस उपायुक्त (उत्तर पश्चिमी) असलम खान ने कहा कि, हत्या का मामला दर्ज किया गया है और जांच चल रही है।

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया की दिल्ली सुरक्षित नहीं है। दिल्ली के लोगों में इंसानियत भी दिन प्रतिदिन कम होती दिख रही है। लोग किसी की मदद करने को तैयार नहीं हैं। ऐसी स्थिति में जुर्म को ख़त्म कर पाना काफी मुश्किल है। अगर जुर्म को जड़ से ख़त्म करना है, तो पहले आम लोगों को एकजुट होने की जरूरत है।

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