Bodh gaya bomb explosion

बोध गया के मंदिर परिषर में बम धमाका, आतंक पैदा करने की थी कोशिश

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Bodh gaya bomb explosion

Bodh gaya bomb explosion

बिहार के बोध गया में एक बड़ा मामला सामने आया है बोध गया मंदिर परिसर में बम फटने की घटना से लोगों में दहशत का माहौल हैइस घटना ने बिहार पुलिस की नींद उड़ा दी है। कड़ी सिक्यूरिटी होने के बाजवूद, वहाँ अपराधी बम लगाने में सक्षम रहे।

शुक्रवार की रात कम पावर वाले बम विस्फोट हए। विस्फोट के बाद बिहार के बोध गया में सुरक्षा तेज कर दी गयी है। बिहार पुलिस एवं खुफिया एजेंसियों का मानना ​​है कि बम एक आतंकवादी संगठन द्वारा लगाए गए थे।

बम लगाने का मकसद 10,000 से ज्यादा पर्यटकों के में आतंक पैदा करना था। दो जीवित बमों का पता लगाने की पुष्टि, मगध रेंज डीआईजी विनय कुमार ने की है। उन्होंने कहा कि दो बक्से में बम की खोज की गई।  एक बम महाबोधि मंदिर के द्वार नंबर 4 के पास, और दूसरी श्रीलंकाई मठ के नजदीक थी। मंदिर के बहुस्तरीय सुरक्षा लेआउट के बावजूद, सभी आगंतुकों को शारीरिक डिटेक्टर फाटकों के माध्यम से पारित किया जा रहा है।

शुक्रवार को लगभग 5 बजे बम विस्फोट हुआ। एक खुफिया एजेंसी के सूत्र ने कहा की लाइव बमों पर एक नज़र से पता चलता है कि, अंदर बैटरी और तार हैं। उन्होंने कहा की विस्फोटकों की प्रकृति के बारे में, इस स्तर पर गंभीर टिप्पणी नहीं कर सकते। पुलिस को उम्मीद है कि दो अन्य बम जो बरामद नहीं हुए अभी, कम पावर का हो सकता है। उन्होंने कहा कि बोध गया मंदिर प्रबंधन समिति के स्थापित मानक  के कारण, मंदिर परिसर में अभी भी सशस्त्र सुरक्षा नहीं दी जा सकती। 7 जुलाई 2013 को, बोधगया मंदिर परिसर में विस्फोट हुआ था। उस समय कुल 13 बम लगाए गए, जिसमें से 10 विस्फोट हुए थे और तीन बरामद और डिफ्यूज किए गए थे।

मंदिर से जुड़ी कुछ विशेष जानकारियाँ

बोध गया बिहार राज्य में आता है। बिहार की राजधानी पटना से यह 200 किलोमीटर दूर है। बिहार की जिला गया के समीप यह एक छोटी सी जगह है। बोध गया के यह मंदिर, मुख्य मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है। मंदिर के अन्दर भगवान बुद्ध की एक विशाल मूर्ति स्थापित है। बोध गया के इस मंदिर में, संसार के अलग-अलग धर्मों के लोग आते हैं। माना जाता है की, यह मंदिर बौधों का सबसे बड़ा तीर्थस्थान है। इस मंदिर को, सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया था। इस मंदिर की रेलिंग, आज बोध गया की सबसे पुरानी अवशेषों में से एक है। बोध गया में काफी संख्या में विदेशी भी आते हैं। मंदिर परिषर में भगवान बुद्ध की मूर्ति स्थापित है। भगवान् बुद्ध ने बोध गया में ही ज्ञान प्राप्त की थी। उन्होंने बोधि पेड़ के नीचे तीन दिन और रात तक तपस्या की थी। उसके बाद उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बोधि पेड़ के नीचे तपस्या के कारण, बुद्ध शब्द उनके नाम में आया। वहां से गौतम बुद्ध सारनाथ की और गए। वहां उन्होंने धर्म का प्रचार किया। सत्य की खोज करने से पहले, भगवान बुद्ध एक राजकुमार थे। सत्य की खोज के लिए उन्होंने सभी सुख सुविधाओं का त्याग किया था

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