Padmavat

पद्मावत के तरह इन फिल्मों का भी विरोध हो चूका है, जानें इनके नाम

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फिल्म पद्मावत अब तक काफी मुश्किलों का सामना कर चुकी है। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत 25 जनवरी को अपनी निर्धारित रिलीज की तारीख पर, सिनेमाघरों में आ रही है। यह फिल्म विभिन्न तूफान और विवादों के माध्यम से गुजर चुकी है। यह पहली बार नहीं है, जब किसी फिल्म की रिलीज़ में मुश्किलें का सामना कर रही है। कई अन्य बॉलीवुड फिल्मों में भाषा, शीर्षक और कभी-कभी गीत को लेकर भी इसी तरह के विरोध देखने को मिल चुके हैं।

यहां फिल्मों की एक सूची है, जो विवादों में पद्मावत से पहले भी फंस चुकी है:

आरक्षण

फिल्म के विषय में जाति आधारित आरक्षण प्रणाली का विरोध किया गया था। कानपुर के कई दलित समूहों ने सैफ अली खान की, दलित व्यक्ति के रूप में कास्टिंग करने का विरोध किया था। फिल्म को उत्तर प्रदेश, पंजाब और आंध्र प्रदेश में प्रतिबंधित कर दिया गया था। बाद में निर्देशक प्रकाश झा ने फिल्म से कुछ दृश्य हटाए, जो सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकते थे।

उड़ता पंजाब

यह फिल्म पंजाब में नशीली दवाओं के खतरे पर आधारित थी। परन्तु इसके विषय को लेकर फिल्म निर्माता फंस गए थे। पूरे देश में राजनीतिक दलों का मानना ​​था कि यह फिल्म, पंजाब की इमेज को खराब कर रही है। फिल्म को उच्च न्यायालयों ने मंजूरी दे दी थी। रिलीज़ रोकने के लिए कुछ दलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुना, लेकिन उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप ना करने का फैसला लिया।

स्टूडेंट ऑफ़ द इयर

इस फिल्म में राधा गाने के कारण विवाद थी। गाने में विशेष रूप से ‘सेक्सी’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था, जिसने विभिन्न धार्मिक संगठनों से आपत्तियों को उठाया था। अंतिम गीत में शब्द को “सेक्सी” से देसी में बदलना पड़ा और विरोध को बंद कर दिया गया।

ऐ दिल है मुश्किल

करन जौहर की इस फिल्म को राजनीतिक विरोधों का बहुत ज्यादा सामना करना पड़ा था। इस फिल्म में पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। एमएनएस ने फिल्म निर्माता को धमकी दी थी। उन्होंने कहा की फिल्म में फवाद के हिस्से को काटे बिना रिलीज़ किया, तो उन्हें इसके गंभीर नतीजे मिलेंगे। करन जौहर ने राजनीतिक दल से वादा किया कि, वह भविष्य में किसी भी पाकिस्तानी अभिनेता के साथ काम नहीं करेंगे। करन ने भारतीय सेना कल्याण फाउंडेशन को 5 करोड़ रूपये का दान भी दिया।

बाजीराव मस्तानी

पेशवा बाजीराव के वंशजों का मानना ​​था कि, ‘पिंग’ गीत मराठी संस्कृति के लिए आक्रामक था। इसमें मस्तानी और काशीबाई ने नृत्य किया था। उनका मानना था की ना सिर्फ गीत बल्कि प्रमुख स्त्रियों की वेशभूषा, और बाजीराव के चरित्र को खराब दिखा गया था।

पीके

फिल्म के पहले पोस्टर के रिलीज़ होने के तुरंत बाद, आमिर खान ने उस पर आपत्ति जताई थी। निर्माताओं ने बाद में एक नया पोस्टर रिलीज़ किया, जहां वह कपड़े पहने हुए थे। पोस्टर के बाद, विभिन्न हिंदू समूहों को फिल्म की कंटेंट पर आपत्ति थी। उन्हें लगा कि आमिर खान और राजकुमार हिरानी ने हिंदुत्व का मजाक उड़ाया है।

मद्रास कैफे

तमिलनाडु में विभिन्न राजनीतिक दलों ने फिल्म ट्रेलर के रिलीज होने के बाद, फिल्म पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा। उन्हें लगा कि फिल्म, तमिल भावना विरोधी है। निर्माता जॉन अब्राहम ने कहा की फिल्म के लिए सीबीएफसी जो भी निर्णय लेता है, वह आगे बढ़ेगा। फिल्म अंततः जारी की गई लेकिन, तमिलनाडु के कुछ थिएटर ने इसे स्क्रीनिंग से दूर रखा था।

 

 

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