55 Year old dalit women was attacked in meerut

बदमाशों ने मेरठ में 55 वर्षीय दलित महिला पर गोली चलायी, बेटे की हत्या में महिला थी मुख्य गवाह

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55 Year old dalit women was attacked in meerut

55 Year old dalit women was attacked in meerut

बीती शनिवार को मेरठ में एक दलित महिला पर गोली चलायी गयी। महिला की उम्र करीबन 55 वर्ष की है। वह अपने बेटे के हत्या के मामले में मुख्य गवाह है। महिला को पुलिस गार्ड सुरक्षा के लिए दिया गया था, पर वह हमले के वक़्त मौजूद नहीं था। तीन दिन बाद महिला के बेटे के हत्या के सिलसिले में, बयान दर्ज बयान दर्ज होने वाला था।

55 वर्षीय सावित्री देवी को, उसके सिर पर गोली की चोट आई है। उनका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा, जहाँ डॉक्टरों ने कहा कि वह गंभीर हालत में हैं। यह दो सप्ताह में जिले में दूसरा ऐसा मामला है। 21 जनवरी को, 60 वर्षीय निचातर कौर और उनके बेटे बलविंदर (26) को गांव में उनके घर के बाहर गोली मार दी गई। दोनों एक दिन बाद अदालत में उपस्थित होने वाले थे।

पुलिस ने बताया कि सावित्री के बेटे चेतन उर्फ ​​भुरा को, 2015 में गोली मार दी गई थी। हत्या के मुख्य साक्षी के रूप में, उनकी माँ को 6 फरवरी को एक स्थानीय अदालत में अपना बयान दर्ज कराना था। जब उन पर शनिवार की सुबह गोली चलाई गई तो पुलिस गार्ड उनके साथ नहीं था, जो उनकी सुरक्षा के लिए उन्हें दिया गया था।

सरूरपुर पुलिस स्टेशन के अधिकारी ऋषि पाल सिंह ने कहा की, शनिवार को लगभग 10.30 बजे एक दलित सावित्री देवी, अपने घर से एक किलोमीटर के आस पास काम करने के लिए गई थी। हमलावर एक मोटरसाइकिल पर वहां पहुंचे और उनपर हमला किया। बंदूक की गोलियों की आवाज़ सुनने पर ग्रामीण उनके पीछे गए, जिसके बाद हमलावर मौके से भाग खड़े हुए।

स्थानीय निवासियों ने महिला को इलाज के लिए अस्पताल में भारती कराया। पीड़ित के सिर पर बुलेट की चोट थी। राजापुर गांव के 14 निवासियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। सभी अभियुक्त जाट समुदाय से संबंधित हैं। प्राथमिकी में नामित 14 लोगों में से तीन, चेतन के हत्या के मामले में भी आरोपी हैं। सभी तीनों को वर्तमान में जमानत पर बाहर कर दिया गया है। एसओ ने कहा की, कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

यूपी में सरकार बदल जाने के बाद भी क्राइम व्यवस्था में, बहुत अधिक सुधार देखने को नहीं मिल रहा। दिन दहाड़े लोगों गोली चलाये जाने के मामले को देखते हुए, कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो जाते हैं। योगी सरकार से पहले यूपी में सपा की सरकार थी। सपा के कार्यकाल में भी क्राइम बेलगाम था। लोगों ने बीजेपी पर भरोसा कर, उन्हें सत्ता में लेकर आई। जनता ने बीजेपी को पूर्ण बहुमत से यूपी में जीताया। इन हत्याओं को देख कर, जनता खुद को ठगी हुई सी महसूस कर सकती है। यूपी में आज 25 आईएएस अधिकारियों के तबादले की खबर भी सामने आई है। इन तबादलों से कानून व्यवस्था में कितनी बदलाव आती है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फ़िलहाल इस मामले में, कड़ी से कड़ी एक्शन लेने की जरुरत है यूपी प्रशाशन को। ऐसे संगीन मामलों में अगर आरोपी बाख निकलेंगे, तो उनका हौसला बुलंद हो जाएगा। दूसरा, अगर गवाह को भी पुलिस बचाने में असफल रहेगी, तो आने वाले समय में कोई भी गवाही देने को तैयार नहीं होगा।

इस घटना को लेकर, आप अपने महत्वपूर्ण राय कमेंट में बता सकते है।

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